🔴 व्यभिचार (Adultery) क्या है? – एक कानूनी दृष्टिकोण 🔹 परिचय: भारतीय समाज में विवाह एक पवित्र संस्था मानी जाती है, जिसमें पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति निष्ठावान रहते हैं। लेकिन जब इस विश्वास को कोई तोड़ता है और विवाह के बाहर संबंध बनाता है, तो इसे "व्यभिचार" (Adultery) कहा जाता है। पूर्व में भारत में व्यभिचार एक दंडनीय अपराध था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए इसे अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। --- 🔹 व्यभिचार की पुरानी परिभाषा (IPC Section 497): भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के अनुसार, > “यदि कोई पुरुष किसी ऐसी स्त्री से सहमति से यौन संबंध बनाता है, जो किसी और की पत्नी है और ऐसा संबंध उसकी जानकारी या सहमति के बिना बनाया गया है, तो यह व्यभिचार माना जाता था और उस पुरुष को 5 साल तक की सजा हो सकती थी।” महत्वपूर्ण बात यह थी कि इसमें केवल पुरुष को अपराधी माना जाता था, महिला को नहीं। --- 🔹 सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय – Joseph Shine v. Union of India (2018): फैसले की तारीख: 27 सितंबर 2018 बेंच: 5 जजों की संविधान पीठ मुख्य निर्णय: धारा 497 को असंव...
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🧿 वैवाहिक जीवन में क्रूरता (Cruelty) क्या होती है? – कानून की दृष्टि से 🔹 प्रस्तावना: विवाह एक सामाजिक व कानूनी बंधन है, जो पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और सम्मान पर आधारित होता है। लेकिन जब इस संबंध में अत्याचार, अपमान या अमानवीय व्यवहार आ जाए, तो इसे क्रूरता (Cruelty) कहा जाता है। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(i-a) के तहत, पति या पत्नी में से कोई भी यदि दूसरे के साथ क्रूरता का व्यवहार करता है, तो यह तलाक का वैध आधार बन सकता है। 🔹 क्रूरता की परिभाषा – सुप्रीम कोर्ट की दृष्टि से Supreme Court ने विभिन्न मामलों में यह स्पष्ट किया है कि क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा नहीं होती, बल्कि मानसिक पीड़ा भी क्रूरता मानी जा सकती है। ⚖️ V. Bhagat v. D. Bhagat (1994) 1 SCC 337 इस मामले में कोर्ट ने कहा: "Mental cruelty का अर्थ है ऐसा व्यवहार जिससे पति या पत्नी का मानसिक संतुलन बिगड़ जाए या जिससे वैवाहिक जीवन असहनीय हो जाए।" ⚖️ Samar Ghosh v. Jaya Ghosh (2007) 4 SCC 511 इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक क्रूरता के कई उदाहरण बताए: झूठे आरोप लगाना परि...
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विवाह के बाद तलाक के कानूनी अधिकार – एक सरल मार्गदर्शिका भारत में विवाह सिर्फ एक सामाजिक रिश्ता नहीं है, बल्कि एक कानूनी अनुबंध भी है। जब यह रिश्ता किसी कारणवश टूटता है, तो पति-पत्नी दोनों को कुछ कानूनी अधिकार और विकल्प मिलते हैं। यह लेख उन लोगों के लिए है जो वैवाहिक जीवन में कठिनाई का सामना कर रहे हैं और अपने कानूनी हक़ जानना चाहते हैं। 📌 तलाक के प्रकार - हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अंतर्गत आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) जब पति-पत्नी दोनों यह तय कर लें कि वे साथ नहीं रह सकते, तो वे मिलकर तलाक के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें कोर्ट को यह दिखाना होता है कि वे पिछले 1 साल से अलग रह रहे हैं और आगे साथ नहीं रह सकते। एकतरफा तलाक (Contested Divorce) अगर एक पक्ष तलाक चाहता है लेकिन दूसरा नहीं मानता, तो यह एकतरफा तलाक कहलाता है। इसके लिए कानूनी आधार (grounds) साबित करने पड़ते हैं जैसे: क्रूरता (Cruelty) व्यभिचार (Adultery) त्याग (Desertion) मानसिक बीमारी धर्म परिवर्तन आदि। ⚖️ तलाक के समय पत्नी के अधिकार भरण-पोषण (Maintenance / Alimony)...