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मानसिक बीमारी और वैवाहिक जीवन भारत में विवाह को केवल दो व्यक्तियों का ही नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन माना जाता है। लेकिन जब जीवनसाथी में से कोई मानसिक बीमारी से पीड़ित हो, तो वैवाहिक जीवन में कई चुनौतियाँ सामने आती हैं। मानसिक बीमारी और विवाह अधिनियम हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) में मानसिक बीमारी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान हैं: धारा 5(ii): विवाह तभी वैध माना जाएगा जब पति-पत्नी में से कोई भी मानसिक रूप से अस्वस्थ न हो। धारा 13(1)(iii): यदि पति या पत्नी गंभीर मानसिक रोग (incurable unsoundness of mind या mental disorder) से पीड़ित हैं और साथ रहना असंभव हो गया है, तो तलाक का आधार (Ground for Divorce) बन सकता है। वैवाहिक जीवन पर प्रभाव सामाजिक दबाव – मानसिक बीमारी अक्सर परिवारों के बीच तनाव और दूरी पैदा करती है। वैवाहिक कर्तव्य – पति-पत्नी के बीच सामंजस्य और जिम्मेदारियाँ निभाने में कठिनाई होती है। संतान पर प्रभाव – बच्चों की परवरिश, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। कानूनी विवाद – कई बार मानसिक बीमारी की वजह से ...
 त्याग (Desertion) : विवाह विच्छेद का एक आधार भारतीय विवाह कानून में पति–पत्नी का साथ रहना केवल सामाजिक ही नहीं बल्कि कानूनी दायित्व भी है। जब एक पक्ष बिना उचित कारण, बिना सहमति और वैवाहिक कर्तव्यों को निभाए बिना दूसरे पक्ष को छोड़ देता है, तो इसे त्याग (Desertion) कहा जाता है। यह Hindu Marriage Act, 1955 की धारा 13(1)(ib) के अंतर्गत विवाह विच्छेद (Divorce) का एक मान्य आधार है। --- त्याग (Desertion) की परिभाषा Actual Desertion : जब पति या पत्नी शारीरिक रूप से अलग हो जाए और वैवाहिक संबंध समाप्त कर दे। Constructive Desertion : जब कोई व्यक्ति घर में रहते हुए भी दूसरे को मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना देकर अलग होने पर मजबूर कर दे। --- त्याग के आवश्यक तत्व किसी भी विवाह विच्छेद याचिका में Desertion सिद्ध करने के लिए निम्न शर्तें आवश्यक हैं – 1. Separation का इरादा (Animus Deserendi) – पति या पत्नी का यह इरादा होना चाहिए कि वह अब इस रिश्ते में नहीं रहना चाहता। 2. बिना सहमति के छोड़ना – एक पक्ष का अलग होना दूसरे की इच्छा या सहमति से नहीं होना चाहिए। 3. पर्याप्त कारण का अभाव – छोड़ने वाले पक्...